आय उपार्जन हेतु खाद्य परिरक्षण एवं प्रसंस्करण उद्योग ऐसे प्रारम्भ करें
ग्रामीण एवं कृषक परिवारों के समक्ष आय और रोज़गार दोनों ही अधिकाधिक चिंतन के विषय है. बढ़ती जनसंख्या के साथ उपलब्ध संसाधनों की कमी होती जा रही है और प्रत्येक पीढ़ी के युवक और युवतियों के रोज़गार का संघर्ष कठिन से कठिनतम होता जा रहा है । अतः अर्थोपार्जन की इस चुनौती का विकल्प खोजना आवश्यक हो गया है । हालाँकि , बढ़ती जनसंख्या बाज़ार में उत्पाद और सेवाओं की माँग में भी वृद्धि कर रहा है जिससे उद्यमिता के क्षेत्र में रोज़गार के सृजन तथा नवीन अवसरों की सम्भावनायें बढ़ी हैं । परंतु यहाँ कौशल की असाधरण कमी है.यदि इस कमी को दूर कर दिया जाये तो खाद्य प्रसंस्करण एक ऐसा क्षेत्र है जिसे प्रारम्भ कर/ अपनाकर कृषक एवं ग्रामीण परिवार अपनी आय को दोगुना या उससे भी ज़्यादा कर सकते हैं । धरती पर प्राणी की उत्पत्ति के साथ ही भोजन जुटाने का कार्य आरम्भ हुआ । मनुष्य के सामाजिक उत्थान के गौरवशाली इतिहास के साथ भोजन के विभिन्न रसों और स्वाद का इतिहास भी जुड़ा हुआ है । कृषि विज्ञान के विकास के साथ ही कृषोपज प्रसंस्करण की विद्या भी विकसित हुई...